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MASAIMARA-Kenya-my African safari tour

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मसाईमारा-अम्बोसिली, केन्या,अफ्रीका ईश्वर की बनायीं हुई सृष्टि में क्या सिर्फ मनुष्यों का ही अधिकार है या अन्य प्राणी भी यहाँ अपनी इच्छानुसार रहने में सक्षम है? क्या हम प्राणियों को सिर्फ मनुष्य निर्मित Zoo में ही देख सकते है ? या उनका अपना भी कोई संसार है जिसमे वो मुक्त विचरण करते है ? सभी प्राणी अपने प्राकृतिक जगत में किस तरह विचरण करते है यह जानने की उत्सुकता ने जंगल की ओर प्रस्थान की प्रेरणा दी .भारतीय वन क्षेत्रो  (जिम कॉर्बेट या गिर राष्ट्रीय या बांधवगढ़ ) में घूमना बहुत अधिक बंधनकारी है एवं आपको वन्य प्राणियों से आमना सामना भी बहुत कम ही होता है .ये क्षेत्र चारो ओर से मनुष्यों के रहवास से भी घिरे हुए है ,अतः पूर्ण प्राणी जगत देखने से हम वंचित रह जाते है। हटारी, अफ्रीकन सफारी , बोर्न फ्री,या सेवेज हार्वेस्ट जैसी उत्कृष्ट हॉलीवुड फिल्मे देख कर एक उत्सुकता जागी थी कि क्या सच में अफ्रीका में इतने अधिक प्राणी है की मनुष्य उनके साथ रहने में असहज महसूस करे । सोचा चल कर देखा जाए...अब कहा जाया जाए ? सवाना...कालाहारी...सेरेंगेटी या मसाईमारा ?? पता चला सर्वश्रेष्ठ केन्या ही ...

UNSEEN KASHMIR-PATNITOP & NATHATOP

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अनदेखा कश्मीर- पटनीटॉप/नाथाटॉप अक्सर कश्मीर सुनते ही हमें श्रीनगर गुलमर्ग पहलगांव की याद आती है। कोई शक नही की ये सारी जगह बेहद खुबसूरत है लेकिन कश्मीर सिर्फ ये चार छ जगहों का ही नाम नही है। यहाँ प्रकृति ने कदम कदम पर खूबसूरती बिखेर रखी है ।सामान्य जन अक्सर इन्हें अनदेखा कर देते है,इन्ही अनदेखी या कम देखी जगहों में एक है पटनीटॉप… सर्दियों में यूथ हॉस्टल एसोसिएशन का सानासर कैंप यही से आयोजित होता है अतः यही जाने का प्रोग्राम बनाया(14 फर.) और एक एक कर दस लोगो का समूह तैयार हो गया.। मालवा एक्स.से रिजर्वेशन करा के अगले दिन रात 10 बजे उधमपुर स्टेशन (जो की सिर्फ 45 किमी की दुरी पर है) उतरे।रात वही एक होटल में बिताई । दूसरा दिन (16 फर.) सुबह नाश्ते के बाद एक वैन बुक की (1800/-) और 8 बजे निकल पड़े। जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को फोर लेन बनाने का काम जोरो पर था तो वैन की गति धीमी हो रही थी। लगभग 20 किमी पश्चात बनिहाल टनल आती है जो श्रीनगर के लिए जाती है।किन्तु हमें पुराने मार्ग से ही जाना था और जैसे जैसे ऊपर की ओर बढ़ने लगे ठंडक भी बढ़ने लगी थी। रास्ता देवदार के वृक्षों से ढ...

STUNNING BEAUTY OF DESERTED LAND-RANN OF KUTCH

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  वीराने का अद्भुत सौदर्य-कच्छ का रण बचपन में भूगोल विषय में जब नक़्शे में रण ऑफ़ कच्छ देखते थे तो समझ नही आता था यहाँ क्या है.उस समय पर्यटन की सुविधाए नही थी तो आम जनमानस भी कच्छ की यात्रा नही कर पाते थे.अतः तब अधिक जानकारी भी उपलब्ध नही थी..समय गुजरा और पर्यटन में रूचि जागृत हुई तब कच्छ भी विश लिस्ट में आ गया.प्राथमिकता तब भी जाने माने पर्यटन क्षेत्र ही रहे.फिर महानायक के विज्ञापन आने शुरू हुए “कच्छ नही देखा तो कुछ नही देखा” तब पुनः बचपन की भूगोल की पुस्तक याद आ गयी.और इस बार प्लान बन ही गया. गुजरात टूरिज्म द्वारा आयोजित रणोत्सव अपनी आवश्यकताओ के अनुरूप नही था (उसमे मांडवी, नारायण सरोवर आदि क्षेत्र शामिल नही थे)अतः स्वतंत्र योजना बनायीं. भुज तक सीधी ट्रेन हमारी तारीख पर नही थी अतः एक दिन बड़ोदा रुक कर वह से सयाजीनगरी एक्सप्रेस ले कर सुबह 7 बजे भुज पहुचे. कच्छ का पहला दिन काला डोंगर (Black Hill) व सफ़ेद रण स्टेशन से सीधे हमारे होटल सहारा पैलेस पहुचे.साफ़ सुथरा होटल, विनम्र स्टाफ,और 2 बालकनी वाला हमारा रूम अगले 4 दिन हमारा निवास था। नाश्ता आदि निपटा के रिसेप्शनिस्ट से टैक्सी बुक कर...

CORBETTE NATIONAL PARK

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  कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान पहला दिन विगत कई वर्षो से इस उद्यान का नाम सुनते रहे थे। इसकी प्रसिद्धि किसी भी यायावर के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु थी।जब भारत के मुख्य पर्यटन क्षेत्र देख चुके तो अब राष्ट्रीय उद्यानों को देखने की इच्छा जागी।तभी यूथ हॉस्टल एसोसिएशन द्वारा घोषित 5 दिवसीय फॅमिली कैम्पिंग पर निगाह पड़ी। मात्र 5250/- की न्यून राशी में दो व्यक्तियों के नन्हे से टेंट में रहना नाश्ता खाना किसी को भी आकर्षित कर सकता था।28 नवम्बर को विवाह की वर्षगांठ वही मनाने का निश्चय किया एवं 26 से 30 नवम्बर का कैंप बुक भी कर लिया जो की कालाढूंगी में स्थित था।कालाढूंगी (Kaladhungi) उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जिले में एक नगर और नगर पंचायत है। यह जिम कार्बेट के ग्रीष्मकालीन आवास के लिये भी जाना जाता है जो कि अब संग्रहालय बना दिया गया है।वैसे तो दिल्ली से यहाँ पहुचने की बस द्वारा उत्तम व्यवस्था है किन्तु हमने ट्रेन का विकल्प चुना एवं जिम कॉर्बेट लिंक एक्स द्वारा दिल्ली से रात 10 बजे निकल के सुबह लगभग 5 बजे रामनगर पहुचे। बेहद साफ़ सुथरा स्टेशन देख के मन प्रसन्न हो गया। यहाँ रेलवे का ...

COORG or kodagu -SCOTTLAND OF EAST

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कोडगु या कुर्ग  कर्णाटक प्रान्त का एक जिला है। इसका मुख्यालय मडिकेरी में है। पश्चिमी घाट पर स्थित पहाड़ों और घाटियों का प्रदेश कुर्ग दक्षिण भारत का एक प्रमुख पर्यटक स्‍थल है। यह खूबसूरत पर्वतीय स्‍थल समुद्र तल से 1525 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां की यात्रा एक न भूलने वाला अनुभव है। कुर्ग के पहाड़, हरे-भरे जंगल, चाय और कॉफी के बागान मन को लुभाते हैं। कावेरी नदी का उदगम स्‍थान कुर्ग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा रिवर राफ्टिंग, हाइकिंग, क्रॉस कंट्री और ट्रेल्‍स के लिए भी मशहूर है। बेटी अंकिता की बंगलौर पोस्टिंग के बाद अक्सर वो कुर्ग चलने को कहती थी तो इस वर्षा ऋतू में वही जाने का प्लान किया। साथ में पुणे से बेटे बहु अंशुल और स्वाति को भी बुला लिया। गणेश चतुर्थी की सुबह 7 बजे गणपति बप्पा मोरिया के साथ टवेरा से यात्रा प्रारंभ की। यात्रा का आरम्भ रास्ते में एक जगह लंच लेते हुए लगभग डेढ़ बजे कूर्ग जिले के एक टाउन कुशलनगर पहुचे जहा palm era रिसोर्ट में बुकिंग थी। चेक इन के पश्चात रिवर राफ्टिंग का प्रोग्राम था। कावेरी नदी पे राफ्टिंग- रिसोर्ट से लगभग 10 किमी दूर दुबारे नामक स्थान पे राफ्टिंग...

MEGHALAY- Beautiful north east

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  मेघालय – शिलोंग , स्कॉटलैंड ऑफ़ दी ईस्ट सुबह गौहाटी स्टेशन पर उतरे और पल्टन बाज़ार तरफ ढेर सारी गाडिया टैक्सी वाले शिलोंग के लिए आवाज़ लगा रहे थे। उनमे से एक मारुती डिजायर में रु.300/-प्रति व्यक्ति किराये में दोनों सवार होके शिलोंग के लिए चल पड़े जो की 100 किमी की दूरी पर स्थित अत्यंत मोहक प्रदेश मेघालय की राजधानी भी है। जैसे जैसे आगे बढे खुबसूरत घुमावदार 4 लेन राष्ट्रीय राजमार्ग शुरू हो गया। साफ़ सुथरा क्षेत्र। ढाई घंटे की मनमोहक यात्रा के बाद गेस्ट हाउस पहुचे।स्नानादि पश्चात टैक्सी लेकर लोकल एरिया घुमने निकले।(टैक्सी ड्राईवर आपसे 1000 से 1500 तक मांग करेंगे)सबसे पहला पॉइंट एलीफैंट फाल्स। रु.10/- एंट्री टिकट ले के नीचे उतरना शुरू किया। काफी नीचे जा के एक के नीचे एक ऐसे 3 स्टेप में है ये सुन्दर सा वॉटरफॉल जिसमे बारहों महीने पानी बहता है ।साफ़ स्वच्छ ठंडा पानी ऊपर से नीचे बहता है। एलीफैंट फॉल अगला पॉइंट शिलोंग टॉप था। ये जगह सबसे ऊपर की पहाड़ी पे स्थित है और पूरा क्षेत्र एयर फ़ोर्स के नियंत्रण में है और सभी को पास ले के ही प्रवेश मिलता है। यहाँ यह बताना जरुरी है की पूर्वोत्तर में ...